Sex giral chaut

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सिर्फ़ ब्लाउस के उपर से चुची दबाकर मज़ा नहीं आ रहा था.मुंबई के बस और ट्रेन में ना जाने कितने ही लड़कियों की चुची दबाई है मैने.अभी आप चैट का फ़्लैश-संस्करण इस्तेमाल कर रहे हैं: यह सर्व-सुविधा युक्त और शक्तिशाली है.आपके कंप्यूटर पर फ़्लैश-प्लेयर जिस तरह से काम कर रहा है, उसे लेकर यदि आप खुश नहीं हैं तो “रॉकर” पर क्लिक करके वेबसाइट के HTML-5 संस्करण को चुन लें.पेशाब करने के बाद मेरा मन फिर चाचीजी के तरफ चला गया और लंड फिर से टाइट हो गया.

मेरा हाथ चाची की साडी पर पड़ा पर मुझे मालूम था की थोडा नीचे हाथ सरकाउं तो जाँघ खुली मिलेगी.

अंदाज़ से मैं उठा और चाचीजी को लाँघने के लिए उनके पांव पर हाथ रखा. चाची जी की साडी उनके घुटनों के उपर सरक गयी थी और मेरा हाथ उनके नंगी जांघों पर पड़ा था.

चाचीजी को कोई आहट नहीं हुई और मैं झट से उठकर रूम के बाहर पेशाब करने चला गया.

इधर मेरी चाची जी को गाँव से लाने का काम मुझे करना था इसलिए मैं गाँव (उत्तर प्रदेश) चला गया.

बात उन दिनों की है जब मेरे चाचा जी की तबीयत खराब हो गयी थी और वो मुंबई के हॉस्पिटल में भरती थे.

मैं तो दीवार के तरफ था और उतरने के लिए चाची के उपर से लाँघना पड़ता था.

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